
'स्वतंत्रता' और 'ट्रांसफर ऑफ पावर एग्रीमेंट' ये दो अलग-अलग शब्द हैं, दोनों का मतलब भी अलग है. 'स्वतंत्रता' जिसका मतलब है 'अपना तंत्र, अपनी व्यवस्था, अपने कायदे-कानून'. और ट्रांसफर ऑफ पावर एग्रीमेंट जिसका मतलब है 'सत्ता का हस्तांतरण'.
आप चुनावों में देखते होंगे कि एक पार्टी की सरकार है और अगर वो चुनाव में हार जाती है तो दूसरी पार्टी की सरकार आती है. तो दूसरी पार्टी का प्रधानमंत्री जब शपथ ग्रहण करता है, तो वो शपथ ग्रहण करने के तुरंत बाद एक रजिस्टर पर हस्ताक्षर करता है. जिस रजिस्टर पर आनेवाला प्रधानमंत्री हस्ताक्षर करता है, उसी रजिस्टर को ट्रांसफर ऑफ पावर की बुक कहते हैं. और उस पर हस्ताक्षर के बाद पुराना प्रधानमंत्री नए प्रधानमंत्री को सत्ता सौंप देता है.

14 अगस्त 1947 की रात को यही हुआ देश आजाद नहीं हुआ, स्वतंत्रता नहीं आई बल्कि ट्रांसफर ऑफ पावर एग्रीमेंट के तहत अंग्रेजों ने अपनी सत्ता भारतीयों को 99 साल के लीज पर सौंपी. उस रात लाॅर्ड माउंट बेटेन ने सिर्फ अपनी सत्ता नेहरू को दी. और हमने मान लिया कि देश स्वतंत्र हो गया. आजादी आ गई.
अगर आप इतिहास की थोड़ी भी समझ रखते होंगे तो आपको मालूम होगा कि भारत की राजनीति का जो सबसे बड़ा पुरोधा थे, जिसने हिन्दुस्तान की आज़ादी की लड़ाई की नींव रखी हो वो व्यक्ति तक 14 अगस्त की रात को दिल्ली में मौजूद नहीं थे, वे नौआखली में थे.
गाँधी जी को बुलाने के लिए कांग्रेस के सभी बड़े नेता उनके पास पास गए कि बापू चलिए आप. लेकिन गाँधी जी ने साफ मना कर दिया था. गाँधी जी कहते थे कि मै मानता नहीं कि देश में कोई आजादी आ रही है. यह तो सत्ता के हस्तांतरण हो रहा है. और गाँधी जी ने नोआखाली से प्रेस विज्ञप्ति जारी की थी.
उस प्रेस विज्ञप्ति के पहले ही वाक्य में गाँधी जी ने ये कहा कि मैं हिन्दुस्तान के उन करोड़ों लोगों को ये सन्देश देना चाहता हूं कि ये जो तथाकथित आजादी आ रही है ये मैं नहीं लाया. ये सत्ता के लालची लोग सत्ता के हस्तांतरण के चक्कर में फंस कर लाये हैं. जिसका सीधा सा मतलब है कि गाँधी जी इससे सहमत नहीं थे.
ट्रांसफर ऑफ पावर एग्रीमेंट के तहत ही भारतीय संविधान में ज्यों का त्यों लगभग 250 आर्टिकल वैसे के वैसे ही हैं, जो अंग्रजों ने गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1935 में बनाए थे, भारतीयों पर शासन करने के लिए, भारत को गुलाम बनाए रखने के लिए. ट्रांसफर ऑफ पावर एंग्रीमेंट के बारे में जब आप अध्ययन करेंगे तो आपको महसूस होगा कि देश में बहुत सारे कानून आज भी लागू हैं, जिसे अंग्रेजों ने भारतवासियों पर शासन करने के लिए बनाए थे. उन कानूनों में बदलाव होना ही चाहिए. लेकिन दुर्भाग्यवश हमारे देश की संसद वो सारे कानून को वैसे ही ढो रही है, आजादी के 78 साल बाद भी उन कानूनों में कोई बदलाव नहीं किया गया.





















Write a comment ...